Jamshedpur:चतुर्थ बाल मेला 2025 के दूसरे दिन मुख्य मंच एक अलग ही मासूमियत और उमंग का साक्षी बना। स्कूल ऑफ होप, आशा किरण, पाथ, स्टार्ट, जीविका, चेशायर होम, स्कूल ऑफ जॉय, ज्ञानोदय और पीएएमएचजे के विशेष बच्चे जब रंग और कागज लेकर बैठे, तो मानो पूरा मंच खिल उठा। जिस मंच से बीते दिन वित्त मंत्री ने मेले का उद्घाटन किया था, आज वही मंच बच्चों की कल्पनाओं और उनके मधुर संवादों से गुलजार था।
सबसे पहले एक बड़ी उम्र की विशेष बच्ची—या कहें युवा महिला—ने मुस्कुराते हुए ज़ोर से कहा, “गुड मॉर्निंग!”
मंच पर थोड़ी देर शांति रही। उन्होंने फिर कहा—“गुड मॉर्निंग!”
इस बार एक हल्की आवाज़ आई—“गुड मॉर्निंग।”
वह फिर बोलीं—“गुड मॉर्निंग!”
और इस बार दो बच्चे एक साथ बोले—“गुड मॉर्निंग!”
उन्हें जैसे दिन की सबसे बड़ी खुशी मिल गई। चेहरे पर चमक फैल गई और वह चुपचाप अपने चित्र में खो गईं।
उधर दो बच्चे आपस में दुनिया की सबसे प्यारी बहस में जुटे थे।
एक बोला—“कितना अच्छा है… सब तरफ बच्चे हैं।”
दूसरा तुरंत बोला—“खाली बच्चे नहीं हैं, उनके मम्मी-पापा भी हैं।”
पहला हँसते हुए बोला—“हां, ठीक बोल रहे हो।”
इतने में एक बच्चा रंगों की कमी से परेशान था—“कलर तो सिर्फ 10 मिले हैं। पिंक भी नहीं है। कैसे काम होगा?”
उसके पास बैठे बच्चे ने तुरन्त मदद की—“मेरे पास 15 कलर हैं। जो चाहिए ले लो… लेकिन मेरे सामने ज्यादा मत बोलना।”
पहला बच्चा चौंका—“मुझे 10 और तुमको 15 क्यों?”
दूसरा बोला—“मैं घर से लाया। मम्मी ने कहा था।”
और जैसे कोई जादू दिखा रहा हो, उसने अपनी पैंट की जेब से रंग निकाले—
“1…2…3…4…16! कुल 16 कलर हैं मेरे पास। तुमसे एक ज्यादा!”
मंच पर बैठे ये बच्चे अपने-अपने अंदाज़ में, अपनी समझ और सीखी हुई बातों के साथ चित्रों में दुनिया बसाते रहे। रंग फैलते गए, मुस्कानें खिलती रहीं, छोटी-छोटी बहसें चलती रहीं—और हर पल इस मेले को और खास बनाता गया।
चित्र बनाकर बच्चों ने उन्हें सूखने रखा और फिर उत्साह के साथ मेले के स्टॉलों की ओर दौड़ पड़े—जैसे दुनिया उनकी ही हो।
चतुर्थ बाल मेला के इस दृश्य ने यह फिर साबित कर दिया कि विशेष बच्चों के बीच होने वाली हर बातचीत, हर मुस्कान और हर रंग—महज गतिविधि नहीं, बल्कि एक अनमोल अनुभव है।









