Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के बराईबुरु, टाटीबा और आसपास के गांवों में बच्चों की शिक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। टाटा स्टील द्वारा 1 अप्रैल से स्कूल बस सेवा बंद किए जाने के बाद दर्जनों बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, जब कंपनी की विजय-2 खदान संचालित थी, तब कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत बच्चों को बड़ाजामदा स्थित स्कूल तक आने-जाने के लिए बस सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी। लेकिन खदान बंद होते ही यह सेवा भी बंद कर दी गई, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बराईबुरु और टाटीबा से बड़ाजामदा की दूरी लगभग 5 से 7 किलोमीटर है। छोटे बच्चों के लिए इतनी लंबी दूरी रोज पैदल तय करना संभव नहीं है। वहीं क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति भी खराब है—बसें या तो समय पर नहीं मिलतीं या पहले से ही यात्रियों से भरी रहती हैं, जिससे बच्चों का स्कूल पहुंचना लगभग असंभव हो गया है।
ग्रामीणों ने कंपनी पर आरोप लगाया है कि CSR की सुविधाएं केवल खदान के संचालन तक सीमित रहीं और बंद होते ही जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या CSR केवल दिखावे तक सीमित है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल बस सेवा का मुद्दा नहीं, बल्कि गरीब और आदिवासी बच्चों के शिक्षा के अधिकार से जुड़ा मामला है। एक ओर सरकार “सबको शिक्षा” का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं जमीनी हकीकत को उजागर करती हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने स्कूल बस सेवा जल्द बहाल करने और कंपनी को CSR के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाने के लिए बाध्य करने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।









