Ghatshila : कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.के. चौधरी नेपाल के मधेश प्रदेश अंतर्गत Janakpur में मैथिली विकास कोष द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, कला एवं नाट्य महोत्सव में सहभागिता कर रविवार, 22 फरवरी 2026 को लौटेंगे। महोत्सव के विभिन्न सत्रों में उनकी सक्रिय और विशेष भागीदारी रही।
पुस्तक विमर्श सत्र में नेपाल से प्रकाशित पुस्तक “जनकपुर धाम” के इतिहास की समीक्षा करते हुए डॉ. चौधरी ने कहा कि इस कृति के प्रकाशन से नेपाल के साहित्यिक और सांस्कृतिक पक्षों पर शोध की नई संभावनाएं खुलेंगी। उन्होंने भारत-नेपाल मैत्री रेल सेवा, जो जयनगर से जनकपुर तक संचालित है, का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध और मजबूत हुए हैं।
समापन सत्र में अपने संदेश में उन्होंने कहा कि 1816 ई. की सुगौली संधि से पूर्व जनकपुर प्राचीन भारतीय मिथिला का हिस्सा था। आज भले ही भारत और नेपाल दो स्वतंत्र राष्ट्र हैं, लेकिन बेटी-रोटी का संबंध और साझा भाषा-संस्कृति दोनों देशों के मिथिला क्षेत्र को जोड़कर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल मैत्री में मिथिला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
महोत्सव के दौरान डॉ. चौधरी ने मधेश प्रदेश के प्रमुख (गवर्नर) Surendra Labh Karn से भी मुलाकात की। गवर्नर कर्ण ने अपने आवासीय कार्यालय में उनका स्वागत किया और अपनी मैथिली पुस्तक “स्मृति-दंश” भेंट की।
साहित्यिक यात्रा के क्रम में डॉ. चौधरी ने Tribhuvan University से संबद्ध 1957 में स्थापित Ram Swaroop Ram Sagar Multiple Campus (आरआरएम) का भी भ्रमण किया। यह तराई क्षेत्र का सबसे पुराना शैक्षणिक संस्थान माना जाता है, जहां 1981 से मैथिली विषय में एमए तक की पढ़ाई हो रही है।
इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद किया। परिसर में उनके आगमन को लेकर विद्यार्थियों और प्राध्यापकों में उत्साह देखा गया। डॉ. चौधरी ने आशा व्यक्त की कि इस साहित्यिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान से भविष्य में दोनों देशों के संस्थानों के बीच परस्पर संबंध और मजबूत होंगे।









