रामगढ़ : संघर्ष ही सफलता की कुंजी है – इस कहावत को हकीकत में बदल दिखाया है अभिषेक तिवारी ने। अभिषेक ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
अभिषेक सेवामुक्त सीसीएल कर्मी माया तिवारी के पुत्र हैं। उनके पिता का निधन वर्ष 1993 में ड्यूटी के दौरान एक हादसे में हो गया था। पिता के निधन के बाद मां माया तिवारी ने अथक संघर्ष कर अभिषेक, उनके बड़े भाई आशुतोष तिवारी और दो बहनों का पालन-पोषण किया। आशुतोष तिवारी ने व्यापार में सफलता हासिल की, जबकि अभिषेक ने प्रशासनिक सेवा में इतिहास रचा।
अभिषेक की प्रारंभिक शिक्षा आर्मी स्कूल, रामगढ़ कैंट में हुई। उन्होंने डॉ. एमजीआर इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने विनोबा भावे विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई कर रांची हाईकोर्ट में वकालत शुरू की।
असफलताओं से भी नहीं डिगा हौसला
अभिषेक के जीवन में कई बार ऐसे मौके आए जब असफलताओं ने उन्हें तोड़ने की कोशिश की। यूपीएससी में कई प्रयासों में असफल रहने और JPSC परीक्षा बार-बार रद्द होने से उनका हौसला कमजोर पड़ा। कई बार ऐसा लगा कि वकालत ही उनका एकमात्र करियर विकल्प रह जाएगा। लेकिन अभिषेक ने हार नहीं मानी। बड़े भाई और परिवार के सहयोग और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति ने उन्हें बार-बार खड़ा किया।
“यह जीत केवल मेरी नहीं”
लंबे संघर्ष और अथक प्रयास के बाद अभिषेक ने सफलता प्राप्त की। उन्होंने कहा – “यह जीत केवल मेरी नहीं है। यह मेरी मां, भाई, बहनों और मेरे गुरुजनों की है। उनके बिना यह संभव नहीं था।”









