झारखंड बार-बेंच विवाद दुर्भाग्यपूर्ण, समाधान के लिए आगे आए बार काउंसिल: अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू

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Jamshedpur : शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने झारखंड हाईकोर्ट में हाल ही में उत्पन्न हुए बार-बेंच विवाद को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि न्याय की मूल भावना को बनाए रखने के लिए दोनों संस्थाओं के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि बार और बेंच समाज तथा देश की न्याय प्रणाली के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जिनके बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न होना न्याय व्यवस्था के लिए हानिकारक हो सकता है।

उन्होंने न्यायमूर्ति राजेश कुमार की पीठ में हुई घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता महेश तिवारी की बात को धैर्यपूर्वक सुना जाना चाहिए था। हर अधिवक्ता अपने मुवक्किल की ओर से मानसिक, पेशागत एवं आर्थिक दबाव के बीच कार्य करता है, और उसका पक्ष रखने का अपना विशिष्ट तरीका होता है। संभव है कि बेंच ने इसे अन्य परिप्रेक्ष्य में लिया हो।

अधिवक्ता पप्पू ने कहा कि अधिवक्ताओं के लिए न्यायालय सीखने का सर्वोच्च मंच है। बेंच की टिप्पणियों को सदैव सीख के तौर पर लिया जाता है, जिससे उनकी कार्यशैली और पेशेवर दक्षता में निखार आता है। इसी प्रकार न्यायालय को भी उदारता दिखाते हुए अवमानना की कार्यवाही को समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

उन्होंने मांग की कि इस विवाद के समाधान के लिए झारखंड स्टेट बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को तत्काल पहल करनी चाहिए, ताकि दोनों संस्थानों के बीच उत्पन्न अविश्वास की स्थिति समाप्त हो सके। पप्पू ने कहा कि यदि शीघ्र समाधान नहीं होता है, तो राज्य बार काउंसिल को अधिवक्ताओं की गरिमा और पेशे की मर्यादा की रक्षा हेतु ठोस निर्णय लेना चाहिए।

उन्होंने विश्वास जताया कि संवाद और समझदारी के माध्यम से इस प्रकरण का समाधान निकालकर न्याय व्यवस्था की गरिमा बहाल की जा सकती है।

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