Jamshedpur:झारखंड सरकार द्वारा 29 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से बनाए जा रहे झारखंड के सबसे बड़े लॉ कॉलेज के निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कॉलेज के पूर्व छात्र सह अधिवक्ता अमर तिवारी ने इस प्रोजेक्ट के डिज़ाइन को भ्रामक और नियमविरुद्ध बताया है। उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
अमर तिवारी का कहना है कि वर्ष 2003 में मानव संसाधन विभाग, झारखंड सरकार के पत्रांक 202 के तहत लॉ कॉलेज को 5 एकड़ जमीन दी गई थी, जबकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार लॉ कॉलेज के लिए न्यूनतम 5 एकड़ भूमि आवश्यक है।
लेकिन, आर्किटेक्ट द्वारा तैयार डिज़ाइन में मात्र 1.4 एकड़ भूमि दिखाकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया — जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
‘स्वतंत्र कॉलेज’ को बना दिया ‘विभाग’, डिजाइन पर सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कॉलेज के लिए जो प्रस्ताव विभाग को भेजा गया, उसमें स्वतंत्र लॉ कॉलेज की जगह उसे जमशेदपुर को-ऑपरेटिव यूनिवर्सिटी का विभाग दिखाया गया है।
अमर तिवारी ने सवाल उठाया कि —
“जब जमशेदपुर को-ऑपरेटिव यूनिवर्सिटी आधिकारिक रूप से अस्तित्व में ही नहीं आई, तो लॉ कॉलेज उसका विभाग कैसे बन गया?”
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जमशेदपुर को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज, कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के अधीन संचालित है और इसका संचालन प्राचार्य प्रभारी जितेंद्र कुमार द्वारा किया जा रहा है।
निर्माण स्थल पर भी अनियमितता का आरोप
अमर तिवारी के अनुसार, जिस स्थल पर भवन निर्माण किया जा रहा है, वह भी गलत जगह है। नियमों के अनुसार, मुख्य सड़क से रास्ता छोड़कर पीछे की ओर निर्माण होना चाहिए था,
लेकिन निर्माण मुख्य सड़क से सटे स्थान पर कराया जा रहा है — जिससे भविष्य में कॉलेज की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आर्किटेक्ट ने कॉलेज प्रशासन से कोई परामर्श लिए बिना डिज़ाइन तैयार किया, जो विभागीय मनमानी और भ्रष्टाचार का संकेत है।
सरकार से कार्रवाई और स्थल निरीक्षण की मांग
पूर्व छात्र ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से अनुरोध किया है कि —
“जब तक स्थल का निरीक्षण नहीं हो जाता, तब तक निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले की तकनीकी जांच और डिजाइन सत्यापन किया जाए ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके।
मुख्य बिंदु एक नज़र में
₹29.90 करोड़ की लागत से झारखंड का सबसे बड़ा लॉ कॉलेज निर्माणाधीन
5 एकड़ जमीन के बदले सिर्फ 1.4 एकड़ पर डिज़ाइन
आर्किटेक्ट पर गलत रिपोर्ट देने का आरोप
कॉलेज को यूनिवर्सिटी का “विभाग” बताने पर आपत्ति
निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग
अमर तिवारी बोले — “लॉ कॉलेज स्वतंत्र संस्था है, किसी विश्वविद्यालय का विभाग नहीं”
“यह कॉलेज 2003 से स्वतंत्र रूप से स्थापित है। इसे किसी यूनिवर्सिटी के अधीन दिखाना बार काउंसिल के मानकों का उल्लंघन है। मैं उच्च शिक्षा मंत्रालय से निवेदन करता हूँ कि इस पूरे मामले की जांच कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।” — अमर तिवारी, अधिवक्ता व पूर्व छात्र









