Jamshedpur:जमशेदपुर के केबुल टाउन स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर (पूर्ववर्ती बिड़ला मंदिर) में चल रहा जीर्णोद्धार कार्य अब केवल एक धार्मिक पहल नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के सामाजिक और औद्योगिक भविष्य से जुड़ता नजर आने लगा है। वर्षों से उपेक्षा और अवरोधों के बीच खड़े इस पवित्र परिसर में जैसे-जैसे पुनर्निर्माण ने गति पकड़ी है, वैसे-वैसे केबुल कंपनी में दोबारा औद्योगिक गतिविधियों के शुरू होने की उम्मीद भी मजबूत होती जा रही है।
मंदिर परिसर में श्रीलक्ष्मीनारायण, माँ काली, भोलेनाथ, प्रथम पूज्य श्री गणेश और पवनपुत्र हनुमान जी के विग्रहों की स्थापना और नियमित पूजा-अर्चना के बाद वातावरण में स्पष्ट परिवर्तन महसूस किया जा रहा है। लंबे समय से मंदिर और उसके आसपास डेरा जमाए अव्यवस्था और नकारात्मकता मानो स्वतः ही छंटती चली गई। स्थानीय लोग इसे दैवीय कृपा मान रहे हैं, तो कुछ इसे सकारात्मक ऊर्जा और सामूहिक संकल्प का परिणाम बता रहे हैं।
इस बदलाव का असर केवल मंदिर तक सीमित नहीं है। वर्षों से ठहरी पड़ी केबुल कंपनी के फिर से चालू होने के संकेत भी मिलने लगे हैं। मंदिर जीर्णोद्धार में आ रही बाधाएँ दूर होने के साथ-साथ औद्योगिक पुनरुत्थान के मार्ग भी खुलते प्रतीत हो रहे हैं।
मंदिर में भगवान विष्णु के दशावतार विग्रहों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जिनका रंग-रोगन कार्य शीघ्र आरंभ होगा। गर्भगृह के चारों कोनों में सनातन संस्कृति के स्तंभ माने जाने वाले चार महर्षि—विश्वामित्र, जमदग्नि, कश्यप और वाल्मीकि—की प्रतिमाएँ भी स्थापित की जा चुकी हैं। संभवतः यह देश का पहला लक्ष्मीनारायण मंदिर होगा, जहां गर्भगृह प्रांगण में विष्णु-लक्ष्मी के साथ दशावतार और चार महर्षि एक साथ विराजमान हैं।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्य मंदिर की बाउंड्री का निर्माण कार्य प्रगति पर है। भव्य गोपुरम् (प्रवेश द्वार) की मरम्मत के साथ उसके शिखर पर पीतल के पाँच कलश स्थापित किए जा रहे हैं। इसके बाद गर्भगृह के सामने विशाल फर्श का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे दर्शनार्थियों को सुगमता मिलेगी।
स्थानीय लोगों और मंदिर से जुड़े सेवाभावियों का विश्वास है कि देवी-देवताओं की कृपा से न केवल मंदिर का कायाकल्प होगा, बल्कि केबुल कंपनी में भी फिर से आर्थिक गतिविधियाँ शुरू होंगी। केबुल टाउन, जो कभी अपनी चहल-पहल और औद्योगिक पहचान के लिए जाना जाता था, एक बार फिर गुलजार होगा।









