Jamshedpur : ग्रैजुएट कॉलेज के मानविकी संकाय द्वारा अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वीणा सिंह प्रियदर्शी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मातृभाषा हमें मां, ममता और मातृभूमि से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। यह हमारी पहचान, संवेदना और सांस्कृतिक जड़ों से संबंध बनाए रखने का सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ. राकेश कुमार पाण्डेय ने मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोग अपनी भाषा की रक्षा के लिए गोलियां खाने तक को तैयार हो जाते हैं और इतिहास में इसके लिए बलिदान भी दिए गए हैं। उन्होंने 21 फरवरी 1952 को पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों की शहादत का उल्लेख किया, जिन्होंने बंगला भाषा को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए प्राण न्योछावर कर दिए।

डॉ. पाण्डेय ने बताया कि भाषाई विविधता के संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए यूनेस्को ने 21 फरवरी 1999 को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की, जिसे विश्वभर में 21 फरवरी 2000 से मनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मातृभाषा समाज और संस्कृति को संरक्षित रखने के साथ-साथ बौद्धिक विकास और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करती है। इसे विलुप्ति से बचाने के लिए समावेशी शिक्षा, विविधता संरक्षण और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना आवश्यक है।
स्वरचित काव्य पाठ ने बांधा समां
इस अवसर पर डॉ. पाण्डेय ने अपने स्वरचित दोहा, चौपाई और ‘दौड़’ छंद का पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया—
दोहा :
भाषा समाज का भाव है, जाति धर्म से भिन्न।
बिनु भाषा ज्ञान के, मानव नीरस जमीन।।
चौपाई :
संस्कृति संस्कार युक्त, ज्ञान-विज्ञान प्रवीण।
मां और ममता दोनों अलग, होते इसके बिन।।
मातृभाषा का संरक्षण, अतिआवश्यक लो जान।
सहज सरल रूप से हमें, देती है हर ज्ञान।।
दौड़ :
है अधूरा ज्ञान इसके बिना,
है अधूरी पहचान इसके बिना।
कहे राकेश इसे संभालो,
खुद बचो और मातृभाषा बचालो।।
प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मान
कार्यक्रम के दूसरे चरण में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
गीत प्रतियोगिता
प्रथम: मनोरमा एवं समूह
द्वितीय (संयुक्त): सरस्वती एवं समूह, रश्मि एवं समूह
तृतीय: निशा एवं समूह
स्लोगन प्रतियोगिता
प्रथम: मोनिका सांडा
द्वितीय: बब्ली पात्रो एवं सिमरन
तृतीय: कुमारी अभ्या
स्वरचित कविता
प्रथम: श्रुति चौधरी
द्वितीय: अंशु कुमारी
तृतीय: खुशबू कुमारी
पोस्टर प्रतियोगिता
प्रथम: मनोरमा पुर्ती
द्वितीय: नंदनी झा
तृतीय: खुशी कुमारी एवं दिशा कुमारी
भाषण प्रतियोगिता
प्रथम: मोनिका सांडा
द्वितीय: श्रुति चौधरी
तृतीय: लवली कुमारी
कार्यक्रम का संयोजन संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिन्हा ने किया। संचालन डॉ. फिरदौस जबीन ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. स्मिता नंदी ने किया। समापन राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. विनय सिंह, डॉ. संगीता बिरुआ, डॉ. अनामिका, डॉ. सुशीला हांसदा, डॉ. वनीश्री डे, डॉ. अनुराधा वर्मा सहित अनेक प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।









