आदित्यपुर बाजार में मासूल के नाम पर गुंडाराज, प्रशासन मौन

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Adityapur : लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर जहां श्रद्धालु पूजा की तैयारी में जुटे हैं, वहीं आदित्यपुर थाना क्षेत्र के आदित्यपुर बाजार में अवैध वसूली का काला खेल उजागर हुआ है। बाजार मासूल के नाम पर दुकानदारों, स्टॉल लगाने वालों और ठेले वालों से प्रतिदिन सैकड़ों से लेकर हजारों रुपए तक वसूले जा रहे हैं। यह पूरा मामला थाना परिसर से कुछ ही मीटर की दूरी पर खुलेआम चल रहा है, जो प्रशासन की निष्क्रियता और मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

छठ पूजा के लिए बाजार में फल, पूजा सामग्री और किराना बेचने वाले दुकानदार दिन-रात मेहनत कर रोज़गार कमाने की उम्मीद रखते हैं। लेकिन कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा बाजार मसूल के नाम पर ₹200 से लेकर ₹1500 तक जबरन वसूले जा रहे हैं। कई दुकानदारों ने बताया कि यदि भुगतान करने से इनकार किया जाए, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार, धमकी और दुकान हटाने की बात कही जाती है।

स्थानीय लोगों ने खुलासा किया कि दीपावली, छठ और अन्य प्रमुख त्योहारों के दौरान हर वर्ष इसी तरह का अवैध वसूली तंत्र सक्रिय हो जाता है। रेलवे फाटक से लेकर थाना रोड और शेरे पंजाब तक—प्रत्येक छोटे-बड़े दुकानदार से 1,000 से 1,500 रुपये तक वसूला जाता है।


आश्चर्यजनक रूप से यह क्षेत्र आदित्यपुर थाना, स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल और बिजली विभाग के सामने पड़ता है—यानी पूरा बाजार सरकारी संस्थानों से घिरा है, फिर भी अवैध वसूली रोकने वाला कोई नहीं। इससे ट्रैफिक जाम की स्थिति इतनी विकराल हो जाती है कि एंबुलेंस भी फंस जाती हैं।

दुकानदारों का कहना है कि यह राशि कृषि उत्पादन बाजार समिति के ठेकेदार को दी जाती है, लेकिन साफ-सफाई केवल कागजों में होती है। नगर निगम के प्रयासों के बिना पूरा बाजार कचरे से भर जाता।

एक वृद्ध महिला ने भयभीत होकर कहा मासूल नहीं देने पर धमकाया जाता है। बोलते हैं दुकान हटवा देंगे या चालान काट देंगे।

क्या कृषि उत्पादन बाजार समिति के पास प्रत्येक दुकान से ₹200 से ₹1500 तक वसूली का कानूनी अधिकार है?

थाना और प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी होते हुए भी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

क्या यह पूरा रैकेट प्रशासनिक संरक्षण में चल रहा है?

आदित्यपुर बाजार मास्टर और इस वसूली तंत्र के पीछे खड़े प्रभावशाली नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। यह रिपोर्ट केवल शुरुआत है।

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