गुंडूरिया शहीद दिवस पर वीर आदिवासी शहीदों को नमन, संजीव सरदार ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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Mayurbhanj:उड़ीसा के मयूरभंज जिले स्थित गुंडूरिया गांव में सोमवार को गुंडूरिया शहीद दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। वर्ष 1949 में आदिवासियों की एक शांतिपूर्ण सभा पर तत्कालीन प्रशासन द्वारा की गई गोलीबारी में शहीद हुए निर्दोष आदिवासी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की स्मृति में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा उड़ीसा प्रदेश की अध्यक्ष अंजली सोरेन की गरिमामयी उपस्थिति रही।

गुंडूरिया शहीद दिवस केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के संघर्ष, बलिदान और अधिकारों की लड़ाई का जीवंत प्रतीक है। गांव की धरती पर शहीदों को याद करते हुए हर चेहरा इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय की गवाही देता नजर आया, जिसे आज भी आदिवासी समाज भूला नहीं है।

शहीद स्थल पर श्रद्धा-सुमन अर्पित
शहीद दिवस के मौके पर पोटका विधायक संजीव सरदार ने घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन और झामुमो के केंद्रीय सदस्य पवन कुमार के साथ शहीद स्थल पर पहुंचकर वीर आदिवासी शहीदों को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। इस दौरान सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों की कुर्बानी को नमन किया।
आदिवासी इतिहास की दर्दनाक त्रासदी

विधायक संजीव सरदार ने अपने संबोधन में कहा कि गुंडूरिया गोलीकांड भारत के आदिवासी इतिहास की सबसे दुखद और हृदयविदारक घटनाओं में से एक है। शांतिपूर्ण सभा पर की गई गोलीबारी ने आदिवासी समाज के अधिकारों और अस्तित्व की लड़ाई को एक नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि यह घटना हमें अन्याय के खिलाफ हमेशा एकजुट होकर खड़े रहने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी शहीदों का बलिदान आज भी सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमें जागरूक करता है। शहीदों की स्मृति को जीवित रखना और उनके सपनों को साकार करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा आदिवासी समाज के हक और सम्मान की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।

इस अवसर पर विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ झामुमो के सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण शहीदों के सम्मान और संघर्ष की भावना से ओतप्रोत नजर आया।

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