गोपालपुर इंडस्ट्रियल पार्क बना हरित ऊर्जा का ग्लोबल केंद्र, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ट्रांज़िशनिंग इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स इनिशिएटिव से जुड़ा

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भारत की ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति को मिलेगा वैश्विक बल, ओडिशा बन रहा टिकाऊ विकास का प्रतीक

जमशेदपुर , जून 2025: टाटा स्टील स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (TSSEZ) का गोपालपुर इंडस्ट्रियल पार्क (GIP) अब वैश्विक मानचित्र पर हरित ऊर्जा हब के रूप में अपनी जगह पक्की करता जा रहा है। इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए GIP को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ‘ट्रांज़िशनिंग इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स इनिशिएटिव’ का हिस्सा बनाया गया है। यह साझेदारी न केवल GIP के लिए बल्कि भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।यह पहल WEF, एक्सेंचर और इलेक्ट्रिक पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (EPRI) द्वारा संयुक्त रूप से क्रियान्वित की जा रही है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों को डीकार्बोनाइज करना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और रोजगार सृजन को नई ऊँचाइयाँ देना है।

GIP: ग्रीन एनर्जी का भविष्य

ओडिशा के गंजाम जिले में स्थित GIP अब तेजी से ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण के एक वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यह पहल भारत के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश को वर्ष 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में अग्रणी बनाना है।

TSSEZL के प्रबंध निदेशक मणिकांत नाइक ने कहा,

“WEF की ट्रांज़िशनिंग इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स इनिशिएटिव का हिस्सा बनना हमारे लिए गर्व की बात है। गोपालपुर इंडस्ट्रियल पार्क न केवल औद्योगिकीकरण का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे डीकार्बोनाइज्ड भविष्य की नींव भी रख रहा है। हम हरित नवाचार, वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और साझेदारियों के माध्यम से भारत के ऊर्जा परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।”

भविष्य की परियोजनाओं का केंद्र

GIP की कुल भूमि का लगभग 25% हिस्सा ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आरक्षित किया गया है। अब तक कई अग्रणी कंपनियों के साथ भूमि पट्टे और आरक्षण समझौते हो चुके हैं, जिनसे कुल मिलाकर 2 मिलियन टन प्रति वर्ष की ग्रीन अमोनिया उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी। इस परियोजना में अनुमानित 27,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। यह अकेला निवेश भारत के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के 10% लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा।

अधोसंरचना और लॉजिस्टिक्स: वैश्विक स्तर की सुविधा

GIP की योजना में आधुनिक लॉजिस्टिक्स पर विशेष ध्यान दिया गया है। यहां एक विशेष 2.5 किमी लंबा और 60 मीटर चौड़ा यूटिलिटी कॉरिडोर विकसित किया गया है जो सीधे गोपालपुर पोर्ट से जुड़ता है। यह कॉरिडोर ग्रीन अमोनिया जैसे संवेदनशील उत्पादों के सुरक्षित और कुशल निर्यात को सुनिश्चित करेगा।

GIP पहले से ही गोपालपुर पोर्ट के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हरित उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति की जा सके। इससे भारत को ग्रीन एनर्जी के निर्यातक के रूप में सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध

GIP में प्रस्तावित डिसेलिनेशन प्लांट समुद्री जल को मीठे जल में परिवर्तित कर उद्योगों की जल आवश्यकताओं को पूरा करेगा, जिससे स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) का विकास किया जा रहा है ताकि औद्योगिक अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

GIP भारत के पश्चिमी हिस्सों से हरित विद्युत के ट्रांसमिशन हेतु भी व्यापक योजना बना रहा है, जिससे ग्रीन एनर्जी आपूर्ति की स्थिरता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।