Jamshedpur : Dr. Rakesh Kumar Pandey, अध्यक्ष Jharkhand State University Contract Teachers Association, ने एक बयान जारी कर राज्य सरकार पर आवश्यकता आधारित शिक्षकों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों से झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत आवश्यकता आधारित शिक्षक उच्च शिक्षा की रीढ़ के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनके भविष्य को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है।
डॉ. पाण्डेय ने कहा कि अक्सर मंत्री यह कहते हैं कि सरकार इन शिक्षकों के बारे में अधिक नहीं सोच रही है क्योंकि Jharkhand Public Service Commission (जेपीएससी) के माध्यम से योग्य शिक्षकों की बहाली की जाएगी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सरकार बताए कि उनके अनुसार योग्यता का पैमाना क्या है, क्योंकि राज्य भर के विश्वविद्यालयों में वर्षों से पढ़ा रहे लगभग 700 आवश्यकता आधारित शिक्षकों को इस तरह अयोग्य ठहराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जब इन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी तब सभी विश्वविद्यालयों ने **University Grants Commission (यूजीसी) के मानकों के अनुसार ही नियुक्ति की थी। ऐसे में अब उनकी योग्यता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
डॉ. पाण्डेय ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार चाहे तो एक गुप्त सर्वे करा सकती है, जिसमें जेपीएससी से नियुक्त शिक्षकों और आवश्यकता आधारित शिक्षकों के कार्य की तुलना की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य के महाविद्यालयों में विद्यार्थियों से फीडबैक लेकर भी वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार आवश्यकता आधारित शिक्षकों को कम मानदेय देती है और उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराती। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों का ईपीएफ नहीं कटता, न मेडिकल सुविधा है और न ही अन्य लाभ, जबकि उनसे सभी प्रकार के शैक्षणिक कार्य लिए जाते हैं।
डॉ. पाण्डेय ने कहा कि सरकार का यह रवैया यह दर्शाता है कि वह आवश्यकता आधारित शिक्षकों की भावनाओं और संवेदनाओं को अनदेखा कर रही है।
उन्होंने कहा कि वे जल्द ही राज्य के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस मुद्दे को उनके समक्ष रखेंगे और शिक्षकों के हित में ठोस निर्णय लेने की मांग करेंगे।








