Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले में इन दिनों रक्त की कमी मरीजों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। चाईबासा सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के लंबे समय से निष्क्रिय रहने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस मुद्दे को लेकर समाजसेवी ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति जिले के स्वास्थ्य तंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
उन्होंने बताया कि 25 अक्टूबर 2025 को थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना सामने आई थी, जिसमें पांच बच्चे पॉजिटिव पाए गए थे। इस घटना के बाद से ही चाईबासा का ब्लड बैंक पूरी तरह निष्क्रिय हो गया है, जिसका खामियाजा अब आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
ब्लड बैंक का रिन्यूअल अब तक नहीं हो पाने के कारण वहां की जांच मशीनें भी काम नहीं कर रही हैं। ऐसे में रक्त के नमूनों को जांच के लिए जमशेदपुर भेजना पड़ता है, जिससे काफी समय लग जाता है। इस देरी के कारण जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता और उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है।
सुनील प्रसाद साव ने कहा कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों और गरीब वर्ग के मरीजों पर पड़ रहा है। उन्हें मजबूरी में जमशेदपुर जाना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता है। कई बार समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है।
उन्होंने उपायुक्त, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद अध्यक्ष, विधायक और सांसद से इस गंभीर समस्या पर शीघ्र ध्यान देने की अपील की है।
सुनील प्रसाद साव ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन जल्द संज्ञान लेकर ब्लड बैंक को पुनः सक्रिय करेगा, ताकि मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
यह मामला जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है और त्वरित समाधान की मांग करता है।










