Chaibasa। चाईबासा में एनएच-220 पर आदिवासी युवाओं पर हुए कथित बर्बर लाठीचार्ज के विरोध में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी द्वारा बुलाया गया पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां बंद पूरी तरह सफल रहा। बंद के दौरान जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित रहा, लेकिन आम जनता और व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपना समर्थन दिया। आवश्यक सेवाएं बाधित नहीं हुईं।
पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हेमंत सरकार जनता की आवाज़ से डरने लगी है। शांतिपूर्ण धरना दे रहे युवाओं पर रात के अंधेरे में पुलिसिया लाठीचार्ज सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “जो सरकार अपने ही आदिवासी बेटों पर लाठी चलवाए, वह जनता का विश्वास खो चुकी है। भाजपा आदिवासी समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस अन्याय के खिलाफ लड़ेगी।”
जनता ने बंद का समर्थन किया — आदित्य साहू
भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि यह बंद पूरी तरह सफल रहा और इसे जनता का व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन जनता का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन हेमंत सरकार विरोध की हर आवाज़ को लाठी और गोली से दबाना चाहती है।”
साहू ने बताया कि चाईबासा बाईपास पर भारी वाहनों के कारण पिछले एक वर्ष में 154 लोगों की मौत हो चुकी है। जनता सिर्फ सुरक्षा की मांग कर रही थी, लेकिन सरकार की संवेदनहीनता ने इसे हिंसक मोड़ दे दिया।
“हेमंत सरकार की जनविरोधी मानसिकता उजागर” — चंपई सोरेन
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज की ‘नो-एंट्री’ जैसी जनहित मांग पर लाठीचार्ज करवाना हेमंत सरकार की बर्बरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “जो सरकार खुद को आदिवासी हितैषी बताती है, वही अब आदिवासियों पर बर्बरता पर उतर आई है। घाटशिला उपचुनाव में जनता इसका जवाब देगी।”
मधु कोड़ा बोले — यह जनता की आवाज़ है
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने बंद को जनता की आवाज़ बताया। उन्होंने कहा कि चाईबासा और सरायकेला के लोग अब अन्याय के खिलाफ एकजुट हैं। “अगर सरकार ने आदिवासियों पर दमन जारी रखा, तो पूरा झारखंड सड़कों पर उतर आएगा,” उन्होंने कहा।
क्षेत्रीय नेताओं की सक्रियता और शांतिपूर्ण बंद
सरायकेला-खरसावां जिले में मीरा मुंडा और उदय सिंह देव, वहीं पश्चिम सिंहभूम में बड़कुंवार गगराई, गीता कोड़ा, और गीता बालमुचू ने बंद को सफल बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई।
पूरे कोल्हान क्षेत्र में बंद शांतिपूर्ण रहा और जनता ने इसे लोकतांत्रिक तरीके से समर्थन दिया।









