Seraikela: सरायकेला-खरसावां जिले में बालू के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नीमडीह के अंचलाधिकारी अभय कुमार द्विवेदी ने आदारडीह स्थित एसएम स्टील कंपनी परिसर से बालू लदे छह हाईवा जब्त किए हैं। बताया जा रहा है कि तिरुलडीह क्षेत्र से बालू लोड कर इन वाहनों के जरिए कंपनी परिसर में आपूर्ति की जा रही थी। गुप्त सूचना के आधार पर सीओ ने कार्रवाई करते हुए सभी छह वाहनों को जब्त किया।
जब्त वाहनों में BR 08 G 5632, JH 01 AX 4189, JH 02 AE 2434, JH 16 A 9226, CG 12 S 6101 और JH 02 AK 2631 शामिल हैं। अंचलाधिकारी के अनुसार, इन वाहनों से कथित तौर पर अवैध रूप से बालू का परिवहन किया जा रहा था। मामले में ओवरलोडिंग की आशंका भी जताई गई है।
सीओ अभय कुमार द्विवेदी ने बताया कि गुप्त सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए छह हाईवा जब्त किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीमडीह क्षेत्र में अवैध खनन और बालू के अवैध परिवहन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल वाहनों से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सुबह छह बजे जब्ती, आठ बजे चालान जारी होने की चर्चा
कार्रवाई के बाद जब्त वाहनों के चालान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वाहनों को सुबह करीब छह बजे कंपनी परिसर में पकड़े जाने के समय उनके पास वैध चालान उपलब्ध नहीं था। वहीं, सुबह करीब आठ बजे चालान जारी किए जाने की बात भी कही जा रही है।
हालांकि, चालान जारी होने के वास्तविक समय और बालू परिवहन से संबंधित दस्तावेजों की वैधता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों की सत्यता प्रशासनिक जांच और संबंधित अभिलेखों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यदि जब्ती के समय चालान उपलब्ध नहीं था और बाद में जारी किया गया, तो चालान के निर्गमन समय, उसकी वैधता और संबंधित परिवहन की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यह भी स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि वाहनों के पास बालू के परिवहन के लिए जरूरी दस्तावेज थे या नहीं।
जांच के निष्कर्षों पर टिकी नजरें
छह हाईवा की जब्ती के बाद क्षेत्र में बालू के खनन, परिवहन और चालान जारी करने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल प्रशासन दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वाहनों से बालू का परिवहन नियमानुसार किया जा रहा था या नहीं और चालान से संबंधित चर्चाओं में कितनी सच्चाई है।
















