टेल्को वर्कर्स यूनियन-98 पर औद्योगिक अशांति के आरोप, ‘फर्जी क्षत्रिय समाज’ के नाम पर विवाद गहराया

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Jamshedpur:टेल्को औद्योगिक क्षेत्र में एक बार फिर तनाव का माहौल बनता दिख रहा है। टेल्को वर्कर्स यूनियन-98 (TWU-98) पर औद्योगिक शांति भंग करने और सामाजिक पहचान का दुरुपयोग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व स्वयं को ‘क्षत्रिय समाज’ का प्रतिनिधि बताकर फर्जी तरीके से आंदोलन चला रहे हैं, जिससे न सिर्फ औद्योगिक माहौल प्रभावित हो रहा है बल्कि एक पूरे समाज की छवि भी धूमिल हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, बंटी सिंह ग्रेड से जुड़े एक पुराने प्रकरण में कथित मजदूर-विरोधी समझौते को लेकर यूनियन द्वारा विरोध किया जा रहा है। इसी मामले में टेल्को वर्कर्स यूनियन-98 की ओर से झारखंड उच्च न्यायालय, रांची में रिट याचिका दाखिल की गई है। याचिका में पुराने वेतनमान में बहाली के साथ-साथ बकाया वेतन (बैकवेज) के भुगतान की मांग की गई है।
हालांकि, इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यूनियन की कार्यशैली को लेकर उठ रहा है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि यूनियन की गतिविधियों पर यह पहली बार नहीं है जब सवाल खड़े हुए हों, लेकिन इस बार मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है। इसके बावजूद अब तक यूनियन के किसी भी पदाधिकारी या आधिकारिक प्रवक्ता की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कंपनी क्वार्टर खाली कराए गए कुछ लोगों को जबरन ‘क्षत्रिय समाज’ से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे समाज विशेष की बदनामी हो रही है और सामाजिक सौहार्द को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल गैर-जिम्मेदाराना हैं बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में शांति बनाए रखने के प्रयासों को भी कमजोर करती हैं।
इस पूरे प्रकरण में टेल्को यूनियन के महामंत्री प्रकाश कुमार, उपाध्यक्ष आकाश दुबे और सक्रिय सदस्य हर्षवर्धन के नाम भी चर्चा में हैं। औद्योगिक गलियारों से लेकर सामाजिक मंचों तक, इस विवाद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यूनियन की ओर से कब और किस तरह की आधिकारिक सफाई सामने आती है।

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