Jamshedpur:टाटा मोटर्स कंवाई चालक संगठन द्वारा बीते दो वर्षों से जारी धरने के दौरान बुधवार को कई अहम और दूरगामी निर्णय लिए गए। संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आंदोलन केवल कंवाई चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि मजदूर हितों से जुड़े हर उस अन्याय के खिलाफ है, जिस पर अब तक चुप्पी साधी गई है।
संगठन ने जानकारी दी कि जमशेदपुर के माननीय उपायुक्त एवं डीएलसी से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जवाब मांगा जाएगा। संगठन का कहना है कि कंवाई चालकों की मांगों पर जो कानूनन प्रावधान लागू करना अनिवार्य है, उसकी जवाबदेही सीधे तौर पर जिला प्रशासन के इन दोनों अधिकारियों की है।
दूसरे अहम फैसले के तहत संगठन ने ऐलान किया कि वर्ष 2026 में जमशेदपुर एवं पूर्वी सिंहभूम में होने वाले उत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आने वाले राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कंवाई चालक संगठन प्रतिनिधिमंडल मिलकर अपनी बात रखेगा। संगठन का आरोप है कि मुख्यमंत्री एवं उनकी धर्मपत्नी द्वारा पूर्व में कई बैठकों के दौरान समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
तीसरे निर्णय में संगठन ने टाटा मोटर्स के बाय सिक्स कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधि बंटी सिंह के समर्थन का ऐलान किया, जिन्हें कंपनी द्वारा बर्खास्त किया गया है। संगठन ने आरोप लगाया कि टाटा मोटर्स की कार्यशैली और यूनियन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। पुराने मजदूरों को 60,000 रुपये और वर्तमान में स्थायी हो रहे मजदूरों को 30,000 रुपये देने जैसे मुद्दों पर भी संगठन ने स्पष्टीकरण की मांग की है।
इसके साथ ही मजदूरों की आवाज उठाने वाले टाटा मोटर्स कर्मचारियों—प्रकाश दुबे, पप्पू, हर्षवर्धन—की बर्खास्तगी पर भी संगठन ने कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि यूनियन के महामंत्री पर लगाए गए आरोपों के मामले में कंवाई चालक संगठन हर संभव सहयोग देगा।
संगठन ने दो टूक कहा कि यह धरना भले ही कंवाई चालकों के नाम पर शुरू हुआ हो, लेकिन इसका दायरा अब कहीं व्यापक हो चुका है। प्रबंधन, जिला प्रशासन, राज्य सरकार और जमशेदपुर के सभी जनप्रतिनिधि—चाहे वे किसी भी दल या पार्टी से हों—सब इसकी जवाबदेही से नहीं बच सकते।
इस निर्णय बैठक में ज्ञान सागर प्रसाद, वीरेंद्र पाठक, त्रिलोचन सिंह, त्रिलोकी चौधरी, हरिशंकर प्रसाद, निर्मल सिंह, भगवान सिंह एवं धर्मेंद्र प्रसाद सहित कई प्रमुख सदस्य मौजूद रहे।









