जमशेदपुर पश्चिम विधायक सरयू राय ने सारण्डा सघन वन को वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित करने की मांग को लेकर दिया प्रेस वक्तव्य

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Ranchi : जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा के विधायक श्री सरयू राय ने प्रेस क्लब सभागार में सारण्डा सघन वन क्षेत्र को वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित करने के विषय पर प्रेस वक्तव्य जारी किया। उन्होंने झारखण्ड सरकार पर जोर दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार 8 अक्टूबर, 2025 से पूर्व सारण्डा वन्यजीव अभ्यारण्य की अधिसूचना जारी की जाए।

सर्वोच्च न्यायालय का आदेश और सरकार की देरी

विधायक सरयू राय ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 17 सितम्बर 2025 को कड़ा आदेश जारी करते हुए झारखण्ड सरकार को 7 अक्टूबर तक सारण्डा वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित करने को कहा है, अन्यथा राज्य के मुख्य सचिव को जेल भेजने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में यह वादा पूरा नहीं किया है।

सारण्डा का खनन इतिहास और खतरा

सरयू राय ने कहा कि सारण्डा वन क्षेत्र में खनन का इतिहास काफी पुराना है। स्वतंत्रता पूर्व और बाद में सार्वजनिक और निजी कंपनियों को बड़े पैमाने पर आयरन ओर और मैंगनीज खनन के लिए लीज दी गई थी। वर्ष 2006 के बाद निजी कंपनियों के खनन लीज के बढ़ते आवेदन से सारण्डा वन क्षेत्र के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 2012 में झारखण्ड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर की थी।

पर्यावरण और संरक्षण की महत्वता

सरयू राय ने बताया कि भारत सरकार और विभिन्न उच्चस्तरीय समितियों ने सारण्डा क्षेत्र के पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए कई सुझाव और अध्ययन प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा कि खनन और विकास का बहाना बनाकर इस प्राकृतिक संपदा को खतरे में डालना उचित नहीं है। उनका कहना है कि वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित होने से पर्यटन और वन उत्पादों से स्थायी आर्थिक लाभ क्षेत्रवासियों को प्राप्त होंगे, जो खनन से मिलने वाले लाभ से कई गुना अधिक हैं।

कानून और न्यायालय के आदेश

विधायक सरयू राय ने यह भी कहा कि कई मुकदमों में सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट कर चुका है कि खनन और पर्यावरण संरक्षण में प्राथमिकता पर्यावरण संरक्षण को दी जाएगी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि झारखण्ड के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव द्वारा प्रस्तावित वन्यजीव अभ्यारण्य और रिजर्व क्षेत्र को स्वीकार कर 8 अक्टूबर से पूर्व अधिसूचना जारी की जाए।

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