जमशेदपुर, 8 जून 2025:
जमशेदपुर क्वीयर सर्कल (JQC) द्वारा बुलेवार्ड होटल, जमशेदपुर में एक लीगल लिटरेसी वर्कशॉप का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य LGBTQIA+ समुदाय को उनके अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक करना और उन्हें सशक्त बनाना था। यह कार्यक्रम C19 RM KP ग्रांट प्रोजेक्ट के अंतर्गत Plan India और The Humsafar Trust के सहयोग से तथा The Global Fund के वित्तपोषण से संपन्न हुआ।
इस प्रेरणादायक वर्कशॉप में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें समुदाय के सदस्य, क़ानूनी विशेषज्ञ, युवा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।



विशेष अतिथि कुनाल सारंगी ने दिया सशक्तिकरण का संदेश
कार्यक्रम के विशेष अतिथि, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय प्रवक्ता श्री कुनाल सारंगी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा:
> “समानता, गरिमा और न्याय केवल शब्द नहीं हैं — ये हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार हैं। LGBTQIA+ समुदाय को न्याय और अधिकारों के साथ खड़े रहने के लिए ऐसे प्रयास बेहद आवश्यक हैं।”
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कार्यशाला में साझा हुई महत्त्वपूर्ण कानूनी जानकारियां
कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पा और ऋषिका द्वारा स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद JQC के संस्थापक सौविक साहा ने भारत में LGBTQIA+ समुदाय के लिए बदलते क़ानूनी परिदृश्य पर प्रकाश डाला।
डॉन हंसर और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के प्रतिनिधि ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) से जुड़े महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर प्रतिभागियों को जानकारी दी।
ऋषिका, JQC की सदस्य, ने NALSA बनाम भारत सरकार और धारा 377 जैसे ऐतिहासिक मामलों पर चर्चा सत्र का संचालन किया।
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जीवन अनुभवों और समाधान आधारित संवाद पर जोर
वर्कशॉप में प्रतिभागियों ने समूह गतिविधियों में भाग लिया, जहाँ उन्होंने अपने जीवन में आए क़ानूनी संघर्षों और अनुभवों को साझा किया। यह संवादात्मक सत्र समाधान की दिशा में सोचने और सामूहिक समझ विकसित करने का एक महत्त्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
कार्यक्रम का समापन “वे फॉरवर्ड” सत्र के साथ हुआ, जिसमें अनुभव साझा किए गए और फीडबैक फॉर्म भरे गए। इस मौके पर सभी प्रतिभागियों के लिए सामूहिक भोज और समूह फोटो का भी आयोजन किया गया।
सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त कदम
यह वर्कशॉप LGBTQIA+ समुदाय के लिए न केवल क़ानूनी जागरूकता का स्रोत बनी, बल्कि इसने आत्म-विश्वास, समावेशिता और न्यायपूर्ण समाज की अवधारणा को भी मजबूती प्रदान की।









